हुसैन तुमको ज़माना सलाम कहता है

हुसैन तुमको ज़माना सलाम कहता है

हुसैन तुमको ज़माना सलाम कहता है
तुम्हारे सजदे को काबा सलाम कहता है
जलाल-ए-कुब्बा-ए-ख़ज़रा सलाम कहता है
चमन का हर गुल-ओ-गुंचा सलाम कहता है
हुसैन तुमको ज़माना सलाम कहता है

चराग़-ओ-मस्जिद-ओ-मिंबर सलाम कहते हैं
नबी रसूल पैग़ंबर सलाम कहते हैं
अली ओ फ़ातिमा शब्बर सलाम कहते हैं
ख़ुदा गवाह है के नाना सलाम कहते हैं

हुसैन तुमको ज़माना सलाम कहता है

मेरे हुसैन तुझे सलाम
मेरे हुसैन तुझे सलाम

अस्सलाम या हुसैन, अस्सलाम या हुसैन
अस्सलाम या हुसैन, अस्सलाम या हुसैन

जिसने हक़ कर्बला में अदा कर दिया
अपने नाना का वादा वफ़ा कर दिया
सब कुछ उम्मत की ख़ातिर फ़िदा कर दिया
घर का घर सब सुपुर्दे ख़ुदा कर दिया
उस हुसैन इब्ने हैदर पे लाखों सलाम

अस्सलाम या हुसैन, अस्सलाम या हुसैन
अस्सलाम या हुसैन, अस्सलाम या हुसैन

ख़ुदा की राह में सर को कटाया तुमने
नबी के दीन पे घर को लुटाया तुमने
निशाने कुफ़्र को यकसर मिटाया तुमने
तुम्हें ख़ुदा भी तुम्हारा सलाम कहता है

हुसैन तुमको ज़माना सलाम कहता है

तुम्हें फ़लक के सितारे सलाम कहते हैं
तुम्हें क़ुरआन के पारे सलाम कहते हैं
तुम्हें हरम के मिनारे सलाम कहते हैं
इमाम तुमको मदीना सलाम कहता है

हुसैन तुमको ज़माना सलाम कहता है

फ़ना के बाद फिर मुझे नई हयात मिल गई
अज़ाब से क़िताब से मुझे नजात मिल गई
सवाल जब किया गया है कौन तेरा पेशवा
तो मैंने कह दिया हुसैन है
मेरा बादशाह हुसैन है, मेरा बादशाह हुसैन है

ये बात की क़दर हसीं जो कह गए मुईनुद्दीन
दीन की पनाह हुसैन है, हाँ हुसैन है
मेरा बादशाह हुसैन है, मेरा बादशाह हुसैन है

सना तुम्हारी वज़ीफ़ा है मेरा आबाई
तुम्हारी मद्ह तो शेवा है मेरा मौलाई
बस एक नज़र हो जो मुझ पर तो मेरी बन आई
तुम्हारा सैय्यिद-ए-शैदा सलाम कहता है

हुसैन तुमको ज़माना सलाम कहता है

 

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