ऐसा हुस्न-ओ-जमाल ! ना-मुम्किन !, कोई उन की मिसाल ! ना-मुम्किन ! / Aisa Husn-o-Jamaal ! Na-Mumkin !, Koi Un Ki Misaal ! Na-Mumkin !
ऐसा हुस्न-ओ-जमाल ! ना-मुम्किन !
कोई उन की मिसाल ! ना-मुम्किन !
बैठ जाए जो उन के क़दमों में
उस को आए ज़वाल ! ना-मुम्किन !
कोई उन की मिसाल ! ना-मुम्किन !
कोई उन की तरह ग़ुलामों का
ऐसे रखे ख़याल ! ना-मुम्किन !
कोई उन की मिसाल ! ना-मुम्किन !
क़ुदसियों ने कहा शब-ए-मे’राज
ऐसा ओज-ए-कमाल ! ना-मुम्किन !
कोई उन की मिसाल ! ना-मुम्किन !
बा’द उन के कोई नबी आए
सोचना भी मुहाल ! ना-मुम्किन !
कोई उन की मिसाल ! ना-मुम्किन !
भेजता जो रहे दुरूद उन पर
वो रहे ख़स्ता-हाल ! ना-मुम्किन !
कोई उन की मिसाल ! ना-मुम्किन !
चश्म-ए-मा-ज़ाग़ के सिवा, सरवर !
रूयत-ए-ज़ुल-जलाल ! ना-मुम्किन !
कोई उन की मिसाल ! ना-मुम्किन !
शायर:
सरवर हुसैन नक़्शबंदी
नात-ख़्वाँ:
सरवर हुसैन नक़्शबंदी- शहज़ाद हनीफ़ मदनी
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