आलम-ए-इस्लाम को ये ईद-ए-मीलाद-उन-नबी
हो मुबारक हो मुबारक ईद-ए-मीलाद-उन-नबी
हो मुबारक अहल-ए-ईमान हो गई क़िस्मत दरख़्शाँ
चार जानिब धूम है सरकार की मीलाद की
झूमता है हर मुसलमान ईद-ए-मीलाद-उन-नबी
घुंचे चटके फूल महके हर तरफ़ आई बहार
हो गई सुब्ह-ए-बहाराँ ईद-ए-मीलाद-उन-नबी
हम न क्यों रोशन करें घर घर दिए मीलाद के
ख़ुद करे जब हक़ चराग़ाँ ईद-ए-मीलाद-उन-नबी
ईद-ए-मीलाद-उन-नबी तो ईद की भी ईद है
बिल यक़ीन है ईद-ए-ईदाँ ईद-ए-मीलाद-उन-नबी
आमिना के घर मुहम्मद की विलादत हो गई
ख़ूब झूमो अहल-ए-ईमान ईद-ए-मीलाद-उन-नबी