आँखें पुरनूर करूँ देख के चेहरा उनका
गर आता हो दम आख़िर मुझे जलवा उनका
मैंने माना कि सियाहकार गुनहगार हूँ मैं
लाज रख ले मेरी मौला कि हूँ शैदा उनका
रोज़-ए-महशर की तमाज़त से बचाएगा मुझे
मेरी बख़्शिश का ज़रिया है ये जलसा उनका
देख लो अहले जहाँ मेरे नबी की उल्फ़त
चूमा है बुलबुल-ए-सिद्रा ने भी तलवा उनका
क्यूँ भला फ़िक्र करूँ रोज़-ए-क़ियामत का तमीम
ख़ुल्द ले जाएगा मुझ को भी वसीला उनका