अब्र-ए-करम गेसू-ए-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
दोनों हरम अब्रू-ए-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
सब से अनोखा मू-ए-मुहम्मद
सब से निराली कू-ए-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
सब की नज़र है सू-ए-काबा
काबा तके है रू-ए-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
काबे को किस ने बनाया क़िब्ला
काबे का काबा रू-ए-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
सज्दा-ए-सर है सू-ए-काबा
सज्दा-ए-दिल है सू-ए-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
सारे चमन में किस की ख़ुशबू
ख़ुशबू है ख़ुशबू-ए्-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
किस की चमक है पैकर-ए-गिल में
गुल में खिला है रू-ए-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
धारे चले हर ऊँगली से उनकी
देखो वो निकली जू-ए-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
किस का मू देता है गवाही
मू-ए-मुहम्मद, मू-ए-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
ज़िंदा है वल्लाह! ज़िंदा है वल्लाह!
जान-ए-दो-आलम रू-ए-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
भीनी भीनी ख़ुशबू लहकी
खुल गए जब गेसू-ए-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
ये राह महकी, वो राह महकी
खुल गए जब गेसू-ए-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
सुब्ह-ए-रुख़-ए-रौशन से दो-बाला
हुस्न-ए-शब-ए-गेसू-ए-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
सुब्ह-ए-मुनव्वर, शाम-ए-मुअंबर
हर-दो-बहम दर रू-ए-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
अख़्तर-ए-ख़स्ता! चल दे जिनाँ को
बाग़-ए-जिनाँ है कू-ए-मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम