ऐ इश्क़-ए-नबी मेरे दिल में भी समा जाना
मुझको भी मुहम्मद ﷺ का दीवाना बना जाना
जिस ख़्वाब में हो जाए दीदार-ए-नबी ﷺ हासिल
ऐ इश्क़ कभी मुझको नींद ऐसी सुला जाना
हर ख़्वाहिश-ए-नफ़्स मेरी एक बुत है मेरे दिल का
बुतख़ाना-ए-दिल मेरा का’बा सा बना जाना
जो रंग के जामी पर रूमी पर चढ़ाया था
उस रंग की कुछ रंगत मुझ पर भी चढ़ा जाना
ख़रक़ानी और बस्तामी मंसूर ने जो पी थी
एक क़तरा उसी मई का मुझको भी पिला जाना
क़ुदरत की निगाहें भी जिस चेहरे को देखती थीं
उस चेहरा-ए-अनवर का दीदार करा जाना
दीदार-ए-मुहम्मद ﷺ की हसरत तो रहे बाक़ी
जुज़ इसके हर एक हसरत इस दिल से मिटा जाना
दुनिया से रियाज़ हो जब अक़बा की तरफ़ जाना
दाग़-ए-ग़म-ए-अहमद ﷺ से सीने को सजा जाना
ऐ काश रियाज़ आए मुज्दा ये मदीने से
सरकार ﷺ बुलाते हैं एक नात सुना जाना