जाम उल्फ़त का पिला दो, या रसूल !
अपना दीवाना बना दो, या रसूल !
मेरी क़िस्मत को जगा दो, या रसूल !
इक झलक अपनी दिखा दो, या रसूल !
ख़्वाब में तशरीफ़ ला कर एक बार
दीद का शर्बत पिला दो, या रसूल !
आ गया बीमार, ऐ मेरे तबीब !
दो शिफ़ा-ए-कामिला दो, या रसूल !
बख़्श देगा हर ख़ता मेरी ख़ुदा
तुम ज़रा लब को हिला दो, या रसूल !
चाँद को उँगली से महद-ए-पाक में
जिस तरफ़ चाहो झुका दो, या रसूल !
कर नहीं सकता सना तेरी ‘उबैद’
दो सलीक़ा-ए-सना दो, या रसूल !