ए मौला इक बार दिखादे
जलवा कमली वाले का
तन मन वारा जिस ने देखा
चेहरा कमली वाले का
ग़ौस क़ुत्ब अब्दाल क़लंदर
सब उन के गुन गाते हैं
फ़र्शें ज़मीन पर अर्श-ए-बरीं पर
चर्चा कमली वाले का
क़ब्र में जब पूछें गे फ़रिश्ते
अपना तआरुफ़ पेश करो
तो कह दूँ गा उन से कि मैं हूँ
मँगता प्यारे आक़ा का
हर नेमत देता है ख़ुदा
पर वार के उन पर देता है
ख़ता है आलम सारा सदक़ा
कमली वाले का
होगी तलब मेरी ये पूरी
दूर वो करें गे वो दूरी
इंशा अल्लाह हम देखेंगे
रौज़ा कमली वाले का