मन-कुंतु मौला ! अली अली !
आक़ा ने बोला ! अली अली !
मैं जिस का मौला ! अली अली !
है उस का मौला ! अली अली !
ज़हरा का शौहर ! अली अली !
हसनैन का बाबा ! अली अली !
हम सब ने पुकारा ! अली अली !
हम सब ने पुकारा ! अली अली !
बड़ा महबूब घराना, अली हैदर का घराना
ग़ुलाम इन का है ज़माना, अली हैदर का घराना
बड़ा महबूब घराना, अली हैदर का घराना
किया हर काम उसी की रज़ा में राज़ी रह कर
ख़ुदा के दीन की ख़ातिर हज़ारों सदमे सेह कर
करे हरदम शुक्राना, अली हैदर का घराना
बड़ा महबूब घराना, अली हैदर का घराना
क़ियादत हो कि इमामत, विलायत हो कि तहारत
शराफ़त हो कि सदाक़त, सख़ावत हो कि शुजा’अत
हर इक अज़मत का ठिकाना, अली हैदर का घराना
बड़ा महबूब घराना, अली हैदर का घराना
पुकारा जब मुश्किल में, उन्होंने की लजपाली
सभी मँगतों की पल में भरी है झोली ख़ाली
झुका जिस दर पे ज़माना, अली हैदर का घराना
बड़ा महबूब घराना, अली हैदर का घराना
मन-कुंतु मौला ! अली अली !
आक़ा ने बोला ! अली अली !
मैं जिस का मौला ! अली अली !
है उस का मौला ! अली अली !
ज़हरा का शौहर ! अली अली !
हसनैन का बाबा ! अली अली !
हम सब ने पुकारा ! अली अली !
हम सब ने पुकारा ! अली अली !
बड़ा महबूब घराना, अली हैदर का घराना
कदी मिम्बर ते खड़ के, कदी मैदान ते लड़ के
कदी नेज़े ते चढ़ के, कदी ख़ुत्बे पढ़ पढ़ के
सिखावे दीन बचाना, अली हैदर दा घराना
बड़ा महबूब घराना, अली हैदर दा घराना
एहदा हजवेरी गदागर, ते ग़ौस-ओ-ख़्वाजा नौकर
देवे अत्तार सलामी, ते सग शहबाज़ क़लंदर
है बण्या सब दा ठिकाना, अली हैदर दा घराना
बड़ा महबूब घराना, अली हैदर दा घराना
मैं पुछिया तेरी जग ते है के तौक़ीर वधाई
ते मोहसिन कौन है तेडा? सदा इस्लाम दी आई
मेडा मोहसिन है पुराना, अली हैदर दा घराना
बड़ा महबूब घराना, अली हैदर दा घराना
नात-ख़्वाँ: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी