Aye Ishq E Nabi Mere Dil Me Bhi Sama Jana Naat Lyrics

Aye Ishq E Nabi Mere Dil Me Bhi Sama Jana Naat Lyrics

Ae Ishq-E-Nabi Mery Dil Mai Bhi Sama Jana

Mujh Ko Bhi Mohammad (S.A.W) Ka Deewana Bana Jana

 

Jo Rang Ke Chandi Par Romii Pa Charhaya Tha

Us Rang Ki Kuch Rangat Mujh Pa Bhi Charha Jana

 

Qudrat Ki Nigahein Bhi Jis Chehry Ko Taktee Theen

Us Chehra-E-Anwar Ka Deedar Kara Jana

 

Jis Khawab Mai Ho Jaye Deedar-E-Nabi Hasil

Aee Ishq Kabhi Mujh Ko Neend Essi Sula Jana

 

Deedar E Mohammad (S.A.W) Ki Hasrat To Rahey Baki

Juzz Is Kai Har Eik Hasrat Is Dil Sey Mita Jana

 

Dunya Se Niaz Ho Jab Un Ko Baki Taraf Jana

Dagh-E-Ghame Ahamad Sey Seny Ko Saja Jana

 

 

 

तरावीह की नमाज़ पढ़ने का आसान और दुरुस्त तरीका /taraweeh ki namaz ka tarika

 

 

रमजान का चाँद देखने के बाद ईद का चाँद देखने तक हर रोज़ ईशा बाद तरावीह की नमाज़ पढ़ी जाती हैं जिसमें हाफिज हमें क़ुरान के पुरे 30 पारा सुनाते हैं तरावीह सुन्नत-ए-मुवक्किदा है अगर कोई शख्स जान बुझ कर तरावीह की नमाज़ छोड़ देते हैं तो वह गुनहगार होगा इसलिए हमें तरावीह की नमाज़ लाज़मी पढ़ना चाहिए तो चलिए तरावीह की नमाज़ पढ़ने का तरीका जान लेते हैं ताकि तरावीह की नमाज़ पढ़ने में आपको कोई तख़लीफ़ न हो आप आसानी के साथ तरावीह की नमाज़ पढ़ सकें।

 

 

taraweeh ki namaz ka tarika in hindi:तरावीह की नमाज़ मर्द और औरत दोनों को पढ़ना चाहिए औरतों को अपने घर पर और मर्दों को मस्जिद में जाकर इमाम के पीछे जमात के साथ पढ़नी चाहिए।

तरावीह की नमाज़ रात में ईशा की नमाज़ पढ़ने के बाद पढ़ी जाती हैं। तरावीह की नमाज़ 20 रकात होती हैं जिसे इमाम शाहब 2-2 रकात करके पढ़ा जाता हैं। और हर चार रकात के बाद तरावीह की ये दुआ पढ़ी जाती है: “सुबहाना ज़िल मुल्की वल मलाकूत। सुबहाना ज़िल इज़्ज़ती वल आज़माती वल हैबती वल कुदरती। वल किबरियाई वल जबारुत। सुबहानल मलिकिल हायिल लज़ी। ला यानामु वला यमुतु सुब-बुहून कुद्दु सुन। रब्बुना व रब्बुल मलाईकती। वररुह अल्लाहुम्मा अजिरना मिनन नार या मुजीरु या मुजीरु या मुजीर। ”

स्टेप 1 तरावीह की नमाज़ पढ़ने के लिए सबसे पहले ईशा की 4 सुन्नत , 4 फ़र्ज़ और 2 सुन्नत और 2 नफिल पढ़े।

स्टेप 2 अब इमाम के साथ तरावीह की नमाज़ पढ़ने के लिए नियत करें आप चाहे तो अकेले भी तरावीह की नमाज़ पढ़ सकते हैं लेकिन जमात से पढ़ेंगे तो ज़्यादा बेहतर होगा।

नियत : “नियत की मैंने दो रकात नमाज़ तरावीह सुन्नत-ए-मुवक्किदा वास्ते अल्लाह ताला के लिए मुँह मेरा काबा शरीफ की तरह पीछे इस इमाम के अल्लाहु अकबर कह कर हाथ बांध लें “

स्टेप 3 अब इसके बाद जब इमाम अल्लाहु अकबर कहते हुए तरावीह की नमाज़ की नियत बांध लें तो आप भी अल्लाहु अकबर कह कर तरावीह की नमाज़ की नियत बांध लें और एक बार सना पढ़ें : “सुबहानकल्लाहुम्मा वबि ‘हम्दिका व तबारकस्मुका व त’आला जद्दुका व ला इलाहा ग़ैरुक”

स्टेप 4 अब इमाम सूरे फातिहा और क़ुरान की तिलवात करेगा आपको शांति से इमाम क़ुरान की जो तिलावत करे उसे सुने। और जब इमाम रुकू में जाये तो रुकू में चले जाये। और इमाम को फॉलो करते हुए दो सजदा करें।

और फिर से इमाम को फॉलो करते हुए खड़े हों जाये। और इमाम जो भी क़ुरान की तिलावत करें उसे सुने और फिर से इमाम को फॉलो करते हुए दूसरी रकात का रुकू करें। और फिर सजदे में चले जाये। और नार्मल नमाज़ की तरह दो सजदा करें और नार्मल नमाज़ की तरह ‘अत्तहिय्यात’ दरूद शरीफ पढ़ कर इमाम के साथ सलाम फेर कर अपनी दो रकात तरावीह की नमाज़ मुकम्मल करें।

इतना करने के बाद आपकी दो रकात नमाज़ तरावीह मुकम्मल हो जाएगी। और इसी तरह से दो-दो रकात करके तरावीह की 20 रकात नमाज़ पढ़े। और हर चार रकात नमाज़ के बाद तरावीह की नमाज़ की दुआ पढ़े।

taraweeh-ki-dua-in-arabic
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और आखिरी यानि बीसवीं रकात के बाद इमाम के साथ दुआ करें और फिर ईशा की 3 रकात वित्र नमाज़ और दो रकात नफिल नमाज़ अदा करें।

इतना करने के बाद आपकी ईशा की नमाज़ और तरावीह की नमाज़ मुकम्मल हो जाएगी उम्मीद हैं आप समझ गए होंगे की तरविह की नमाज़ पढ़ने का तरीका क्या हैं। अगर आपका कोई सवाल हैं तो आप कमेंट करके पूछ सकते हैं इंशाअल्लाह आपके सवाल का जवाब लाज़मी दिए जायेगा।

तरावीह की नमाज़ किसने शुरू की ?
तरावीह की नमाज़ हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मोहम्मद मुश्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने शुरू की थी लेकिन आपने अपनी ज़िन्दगी में सिर्फ 3 बार ही तरावीह की नमाज़ अदा की थी। जानकर कहते हैं की आपने तरावीह की नमाज़ पाबन्दी से इसलिए नहीं अदा की क्योंकि आप चाहते थे की तरावीह की नमाज़ मुसलमानों पर फ़र्ज़ न हो।

जब आप मोहम्म्द स.अ. की वफ़ात हो गई तो हज़रत उमर फारूक रजि० के शासनकाल के दौरान तरावीह 20 रकात कर दी गई थी। कुछ वक़्त तक एक ही मस्जिद में बहुत सी जमातों के साथ तरावीह की नमाज़ अदा होती थी यानि एक ही मस्जिद में काई अलग अलग जमाते हुआ करती थी। फिर उमर फारूक रजि० ने सभी को एक इमाम के पीछे खड़ा कर दिया और जब से लेकर आज तक दुनिया भर के मुसलामन एक मस्जिद में सिर्फ एक ही इमाम के पीछे मुसलसल 20 रकात नमाज़ तरावीह की पढ़ते आ रहे हैं।

हालाँकि अहले हदीस सिर्फ 8 रकात तरावीह की नमाज़ पढ़ते हैं और शिया हज़रात तरावीह की नमाज़ ही नहीं पढ़ते बाकि जितनी भी मुस्लिम हैं तक़रीबन सभी तरावीह की नमाज़ अदा करते हैं।

तरावीह की नमाज कितने रकात की होती है?
तरावीह की 20 रकात नमाज़ होती हैं।
Taraweeh ki namaz Sunnat Hai Ya nafil
तरावीह की नमाज़ सुन्नत हैं

तरावीह की नियत कैसे की जाती है?
नियत की मैंने दो रकात नमाज़ तरावीह सुन्नत-ए-मुवक्किदा वास्ते अल्लाह ताला के लिए मुँह मेरा काबा शरीफ की तरह पीछे इस इमाम के अल्लाहु अकबर कह कर हाथ बांध लें

 

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