दुनिया में सदा मुल्क का सम्मान रहेगा
दुनिया में सदा मुल्क का सम्मान रहेगा
हर हिन्दू-मुसलमान की तू जान रहेगा
ये झंडा तेरी शान बताता है जहाँ को
‘अज़मत मेरे भारत की दिखाता है जहाँ को
दुश्मन के लिए शेर हैं तय्यार तुम्हारे
डरते नहीं दुनिया से ये अंसार तुम्हारे
सरहद पे खड़ा तेरा निगहबान रहेगा
हर हिन्दू-मुसलमान की तू जान रहेगा
दुनिया में सदा मुल्क का सम्मान रहेगा
हर हिन्दू-मुसलमान की तू जान रहेगा
हम ने ही निकाला है ग़ुलामी से वतन को
गुलज़ार बनाया है लहू दे के चमन को
हर सिम्त खिले फूल हैं और ताज़ा हवा है
आज़ाद परिंदे हैं, यहाँ कैसी फ़िज़ा है
अब इस में बहारों का ही ‘उनवान रहेगा
हर हिन्दू-मुसलमान की तू जान रहेगा
दुनिया में सदा मुल्क का सम्मान रहेगा
हर हिन्दू-मुसलमान की तू जान रहेगा
सूरज नया निकला है ज़माने पे ‘अयाँ है
भारत तेरी धरती पे तो जन्नत का समाँ है
क्या शान से बहती हैं यहाँ जमना-ओ-गंगा
हर शख़्स के है हाथ में इक अपना तिरंगा
ये जश्न-ए-बहाराँ है हर इक आन रहेगा
हर हिन्दू-मुसलमान की तू जान रहेगा
दुनिया में सदा मुल्क का सम्मान रहेगा
हर हिन्दू-मुसलमान की तू जान रहेगा
मेहनत से बड़ी देश ये आज़ाद हुआ है
इस मुल्क पे अपने तो बुज़ुर्गों की दु’आ है
नानक की है, चिश्ती की है ये राम की धरती
मालिक तेरी रहमत की है, इन’आम की धरती
गीता भी रहेगी यहाँ क़ुरआन रहेगा
हर हिन्दू-मुसलमान की तू जान रहेगा
दुनिया में सदा मुल्क का सम्मान रहेगा
हर हिन्दू-मुसलमान की तू जान रहेगा
इस्कूल हो, कालिज हो या कोई मदरसा
हर एक के आँगन में लगा आज तिरंगा
सब नग़्मा सुनाते हैं यहाँ देश के अंदर
शहबाज़ उड़ा तोड़ के पिंजरा है फ़लक पर
दुश्मन के लिए ख़ौफ़ का सामान रहेगा
हर हिन्दू-मुसलमान की तू जान रहेगा
दुनिया में सदा मुल्क का सम्मान रहेगा
हर हिन्दू-मुसलमान की तू जान रहेगा
शायर:
इंजीनियर आदिल फ़राज़
नशीद-ख़्वाँ:
अरशद हिन्दुस्तानी