फासलों को तकल्लुफ़ है हमसे अगर (Hindi Lyrics)
फासलों को तकल्लुफ़ है हमसे अगर
हम भी बेबस नहीं, बे सहारा नहीं
खुद उन्हीं को पुकारेंगे हम दूर से
रास्ते में अगर पांव थक जाएंगे
हम मदीने में तन्हा निकल जाएंगे
और गलियों में क़सदन भटक जाएंगे
हम वहां जाकर वापस नहीं आएंगे
ढूंढ़ते-ढूंढ़ते लोग थक जाएंगे
जैसे ही सब्ज़ गुम्बद नज़र आएगा
बंदगी का क़रीना बदल जाएगा
सर झुकाने की फुर्सत मिलेगी किसे
खुद ही पलकों से सजदे टपक जाएंगे
नाम आका जहां भी लिया जाएगा
ज़िक्र उनका जहां भी किया जाएगा
नूर ही नूर सीनों में भर जाएगा
सारी महफ़िल में जलवे लपक जाएंगे
ए मदीने के ज़ायर खुदा के लिए
दास्तान-ए-सफ़र मुझको यूं मत सुना
बात बढ़ जाएगी, दिल तड़प जाएगा
मेरे मुहतात आंसू छलक जाएंगे
उनकी चश्म-ए-करम को है इसकी खबर
किस मुसाफिर को है कितना शौक-ए-सफ़र
हमको इक़बाल जब भी इजाज़त मिली
हम भी आका के दरबार तक जाएंगे