पीरों के आप पीर हैं या ग़ौस अल-मदद /
पीरों के आप पीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद
अहल-ए-सफ़ा के मीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद
रंज-ओ-अलम कसीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद
हम ‘आजिज़-ओ-असीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद
हम कैसे जी रहे हैं ये तुम से क्या कहें
हम हैं, अलम के तीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद
तीर-ए-नज़र से फेर दो सारे अलम के तीर
क्या ये अलम के तीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद
तेरे ही हाथ लाज है, या पीर-ए-दस्त-गीर !
हम तुझ से दस्त-गीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद
इदफ़ा’ शरार शर, या ग़ौसनल-अबर
शर के शरर ख़तीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद
किस दिल से हो बयान-ए-बेदाद-ए-ज़ालिमाँ
ज़ालिम बड़े शरीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद
अहल-ए-सफ़ा ने पाई तुम से रह-ए-सफ़ा
सब तुम से मुस्तनीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद
सदक़ा रसूल-ए-पाक का झोली में डाल दो
हम क़ादरी फ़क़ीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद
दिल की सुनाए अख़्तर दिल की ज़बान में
कहते ये बहते नीर हैं, या ग़ौस ! अल-मदद
शायर:
अख़्तर रज़ा ख़ान
ना’त-ख़्वाँ:
ओवैस रज़ा क़ादरी
सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी
साबिर रज़ा अज़हरी