रहमत बरस रही है मुहम्मद के शहर में

 

रहमत बरस रही है मुहम्मद के शहर में
हर शै में ताज़गी है मुहम्मद के शहर में

हर एक भर रहा है यहाँ दामने मुराद
मखलूक आ रही है मुहम्मद के शहर में

आते हैं बख्शवाने गुनाहों को गुनाहगार
किस्मत बदल रही है मुहम्मद के शहर में

हर शै में ताज़गी है मुहम्मद के शहर में

दौलत सुकून की हर जगह हम ढूंढते रहे
आख़िर ये मिल गई है मुहम्मद के शहर में

हर सिम्त आ रही हैं सदाए दुरूद की
इक धूम सी मची है मुहम्मद के शहर में

ऐ सा लगा के सामने खुद आ गए हुज़ूर
एक नात जब पढ़ी है मुहम्मद के शहर में

रोशन है जिस के नूर से दोनों जहाँ रियाज़
ऐ सी शमा जली है मुहम्मद के शहर में

रहमत बरस रही है मुहम्मद के शहर में
हर शै में ताज़गी है मुहम्मद के शहर में

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