तेरी वहशतों से ऐ दिल, मुझे क्यूँ न आर आए
तू उन्हीं से दूर भागे, जिन्हें तुझ पे प्यार आए
दम-ए-इज़्तिराब मुझको, जो ख़याल-ए-यार आए
मेरे दिल में चैन आए, तो इसे क़रार आए
न हबीब से मुहिब का, कहीं ऐसा प्यार देखा
वो बने ख़ुदा का प्यारा, तुम्हें जिस पे प्यार आए
मुझे क्या हो ग़म अलम का, मुझे क्या हो ग़म अलम का
कि इलाज ग़म अलम का, मेरे ग़म-गुसार आए
जो चमन बनाए बन को, जो जिनाँ करे चमन को
मेरे बाग़ में इलाही, कभी वो बहार आए
सबब-ए-वुफ़ूर-ए-रहमत, मेरी बे-ज़बानियाँ हैं
न फ़ुग़ाँ के ढंग जानूँ, न मुझे पुकार आए
तेरी रहमतों से कम हैं, मेरे जुर्म इससे ज़ायद
न मुझे हिसाब आए, न मुझे शुमार आए
तेरे सदक़े जाए शाहा, ये तेरा ज़लील मंगता
वो वक़ार ले के जाए, जो ज़लील-ओ-ख़्वार आए