एक बार मदीने में हो जाए मेरा जाना

एक बार मदीने में हो जाए मेरा जाना गीत || मिलाद रज़ा

एक बार मदीने में हो जाएगा मेरा जाना,
फिर और न कुछ मांगे सरकार का दीवाना

एक बार मदीने में हो जाएगा मेरा जाना

पल पल मेरा दिल तड़पे दिन रात करे जारी
कब आऊं मदीने में कब आये मेरी बारी
कब जाके मैं देखूंगा दरबार वोन शाहाना

एक बार मदीने में हो जाएगा मेरा जाना

 

 

क्या आस पे जीता हूं एक रोज़ बुलाएंगे
और गुंबदे खजरा का दीदार कराएंगे
फिर पेश करूंगा मैं अश्कों भरा नजराना

एक बार मदीने में हो जाएगा मेरा जाना

बेचैन निगाहों को दीदार अता करदो
दामन मेरा खुशियों से या शाहे उम्मीद भर दो
आबाद ख़ुदा रक्खे आक़ा तेरा मैखाना

एक बार मदीने में हो जाएगा मेरा जाना

इतनी सी तमन्ना है हो जाये अगर पूरी
जा देखूं मदीना में हो जाए जो मंज़ूरी
बिन दीद किये शाहा मर जाये न दीवाना

एक बार मदीने में हो जाएगा मेरा जाना

 

 

 

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