ज़िंदगी ये नहीं है किसी के लिए

वल्लाह वल्लाह वल्लाह
वल्लाह वल्लाह वल्लाह

ज़िंदगी ये नहीं है किसी के लिए
ज़िदगी है नबी की नबी के लिए

ना समझ मरते हैं ज़िदगी के लिए
जीना मरना है सब कुछ नबी के लिए

चाँदनी चार दिन है सभी के लिए
है सदा चाँद ‘अब्दुन्नबी के लिए

अंत-फ़ी-हिम के दामन में मुन्किर भी है
हम रहे इशरते-दाइमी के लिए

दाग़े-इश्क़े-नबी ले चलो क़ब्र में
है चराग़े-लहद रोशनी के लिए

ऐश कर लो यहाँ, मुन्किरों ! चार दिन
मर के तरसोगे इस ज़िदगी के लिए

नक़शे-पाए-सगाने-नबी देखिये
ये परा है बहुत रहबरी के लिए

मस्लके-आला हज़रत सलामत रहे
एक पहचान दीने-नबी के लिए

मस्लके-आला हज़रत पे क़ाइम रहो
ज़िंदगी दी गई है इसी के लिए

सुल्हे-कुल्ली नबी का नहीं, सुन्नियो !
सुन्नी मुस्लिम है सच्चा नबी के लिए

वो बुलाते हैं कोई यो आवाज़ दे
दम में जा पहुँचूँ मैं हाज़री के लिए

ऐ नसीमे-सबा ! उन से कह दे ज़रा
मुज़्तरिब है गदा हाज़री के लिए

जिन के दिल में है इश्क़े-नबी चमक
वो तरसते नहीं चाँदनी के लिए

जिन के दिल में है इश्क़े-नबी की चमक
वो हैं नज्मे-ज़माँ रोशनी के लिए

“अख़्तरे-क़ादरी” ख़ुल्द में चल दीया
ख़ुल्द वा है हर इक क़ादरी के लिए

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