आख़िरी लम्हों में क्या शहर-ओ-बियाबाँ देखूं

आख़िरी लम्हों में क्या शहर-ओ-बियाबाँ देखूं Lyrics in Hindi

आख़िरी वक़्त में क्या रौनक़-ए-दुनिया देखूं
अब तो बस एक ही धुन है कि मदीना देखूं

रू-ब-रू रौज़ा-ए-सरकार के हो महफ़िल-ए-नात
काश तैबा हसीन ऐसा ज़माना देखूं

साइल-ए-दर को शहंशाह-ए-ज़माना कर दें
शाह-ए-बत्हा का वो अंदाज़-ए-शाहाना देखूं

सज्दा-ए-सर मैं करूं काबे की अज़मत के लिए
सज्दा-ए-दिल के लिए काबे का काबा देखूं

उनके दरबार में कुछ हमको मिले ऐसी अता
औज पे अपने मुक़द्दर का सितारा देखूं

या नबी कर दो मेरे दिल को सभी ज़ंग से पाक
वस्ल की रात को मैं दिल का चमकना देखूं

सदक़ा-ए-आले नबी हमको मिले आज की शब
गुलशन-ए-ज़हरा का रंगीन नज़ारा देखूं

माल-ओ-ज़र पास नहीं और न पर हैं मेरे
बड़ा मुश्किल है कि मैं जाके मदीना देखूं

साबिर-ए-चिश्ती तड़प दिल में यूँ कर ले पैदा
आँख जो बंद करूं प्यारा मदीना देखूं

यूँ तो इस वक़्त भी आँखों में है रौज़ा उनका
मेरे आक़ा का हक़ीक़त में बुलाना देखूं

वो यक़ीनन मुझे बुलवाएँगे तैबा साबिर
और वहीं शान से मैं जान का जाना देखूं

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