अमल नहीं कुछ भी ये हाल हमारा है
बस आप की रहमत का सर्कार सहारा है
डूबा हूँ गुनाहों में, सर्कार करम करना
रहमत भी तुम्हारी, बंदा भी तुम्हारा है
ऐ मौत ज़रा रुक जा, क्या इतनी भी जल्दी है
आँखों में अभी मेरी, तैबा का नज़ारा है
चाहे ये जहाँ छूटे, चाहे ये जहाँ रूठे
टूटे न शहा तुम से, रिश्ता जो हमारा है
टूटे न मेरे मौला, रिश्ता जो हमारा है
है पस्त अगर क़िस्मत, घबरा न अमीन आसी
वो जीत गया महशर, दुनिया में जो हारा है
तौफ़ीक़ मुझे दी है, दुनिया में जो नातों की
महशर में भी कह देना, फ़ुरक़ान हमारा है
शायर: मुहम्मद अमीन