DELHI RAJASTHAN TUMHARA YA KHWAJA NAAT LYRICS

DELHI RAJASTHAN TUMHARA YA KHWAJA NAAT LYRICS

DELHI RAJASTHAN TUMHARA YA KHWAJA NAAT LYRICS

Delhi Rajasthan Tumhara Ya Khwaja (x2)
Saara Hindustan Tumhara Ya Khwaja

Hind Main Navve Lakh Ko Kalma Padhwaya (x3)
Hum Par Hai Ahsaan Tumhara Ya Khwaja

Aap Pe Hai Faizan Janab-e-Usman Ka
Hum Par Hai Faizan Tumhara Ya Khwaja

Saara Anasagar Kunje Me Bhar Aaya
Sunte Hi Farmaan Tumhara Ya Khwaja

Faiz-e-Madina Milta Hai Ajmer Se Hi
Roza Hai Zeeshan Tumhara Ya Khwaja

Jisne Sajayi Khwaja Tumhari Ye Mehfil
Kardo Beda Par Usika Ya Khwaja

Syed Ko Taybah Ki Galiyan Dikhla Do
Hai Adnaa Darban Tumhara Ya Khwaja

Hargiz Na Samman Wo Paayega Jag Me
Jo Bhi Kare Apman Tumhara Ya Khwaja

Hum Sab Ko Taybah Ki Galiyan Dikhla Do
Ho Nazre Karam Sarkar Hamare Ya Khwaja

 

DELHI RAJASTHAN TUMHARA YA KHWAJA NAAT LYRICS

 

दिल्ली राजस्थान तुमहारा ख्वाजा (x2)
सारा हिंदुस्तान तुमहारा या ख्वाजा

हिंद में नववे लाख को कलमा पढवाया (x3)
हम पर है एहसान तुमहारा या ख्वाजा

आप पे है फैजान जनाबे उस्मान का
हम पर है फैजान तुमहारा या ख्वाजा

सारा अनासागर कुंजे मे भर आया
सुनते ही फरमाँ तुमहारा या ख्वाजा

फैज़े मदीना मिलाता है अजमेर से ही
रोज़ा है जीशान तुमहारा या ख्वाजा

जिसने सजाइ ख्वाजा तुमहारी ये महफिल
करदो बेदा पार उसिका या ख्वाजा

सैयद को तयबाह की गलियां दीखला दो
है अदना दरबान तुमहरा या ख्वाजा

हरगिज न सन्मान वो पायेगा जग मे
जो भी करे अपमान तुमहारा या ख्वाजा

हम सब को तयबाह की गलियां दीखला दो
हो नज़रे करम सरकार हमारे या ख्वाजा

 

DELHI RAJASTHAN TUMHARA YA KHWAJA NAAT LYRICS

દિલ્હી રાજસ્થાન તુમ્હારા યા ખ્વાજા (x2)
સારા હિન્દુસ્તાન તુમ્હારા યા ખ્વાજા

હિન્દ મેં નવ્વે લાખ કો કલમા પઢવાયા (x3)
હમ પર હૈ એહસાન તુમ્હારા યા ખ્વાજા

આપ પે હૈ ફૈઝાન જનાબે ઉસ્માં કા
હમ પર હૈ ફૈઝાન તુમ્હારા યા ખ્વાજા

સારા અનાસાગર કુંજે મેં ભર આયા
સુનતે હી ફરમાન તુમ્હારા યા ખ્વાજા

ફૈઝે મદીના મિલતા હૈ અજમેર સે હી
રોઝા હૈ ઝીશાન તુમ્હારા યા ખ્વાજા

જિસને સજાયી ખ્વાજા તુમ્હારી યે મહેફિલ
કરદો બેડા પાર ઉસીકા યા ખ્વાજા

સૈયદ કો તયબાહ કી ગલીયાં દિખલા દો
હૈ અદના દરબાન તુમ્હારા યા ખ્વાજા

હરગીઝ ના સન્માન વો પાયેગા જગ મે
જો ભી કરે અપમાન તુમ્હારા યા ખ્વાજા

હમ સબ કો તયબાહ કી ગલિયાં દિખલા દો
હો નઝરે કરમ સરકાર હમારે યા ખ્વાજા

Delhi Rajasthan Tumhara Ya Khwaja
Saara Hindustan Tumhara Ya Khwaja

Hind May Navve Lakh Ko Kalma Padhwaya
Hum Per Hai Ahsaan Tumhara Ya Khwaja

Saara Anasagar Kuze May Bhar Aaya
Sunte Hi Farmaan Tumhara Ya Khwaja

Aap Pe Hai Faizan Janab E Usman Ka
Hum Per Hai Faizan Tumhara Ya Khwaja

Faiz E Madina Milta Hai Ajmer Se Hi
Roza Hai Zeeshan Tumhara Ya Khwaja

Rahe Sunni Dawat E Islami
Ye To Hai Faizan Tumhara Ya Khwaja

In Dono Per Khaas Karam Tum Farmana
Shakir Aur Rizwan Tumhara Ya Khwaja

Syed Ko Taibah Ki Galiya Dikhla Do
Hai Adnaa Darban Tumhara Ya Khwaja

Wallah Mere Khwaja Ka Darbar Nirala hai Manqabat Lyrics

Adab Se Arz Hai Ba Chashm-e-Tar Gharib Nawaz Lyrics

दिल्ली राजस्थान तुम्हारा, या ख़्वाजा !
सारा हिन्दुस्तान तुम्हारा, या ख़्वाजा !

हिन्द में नव्वे लाख को कलमा पढ़वाया
हम पर है एहसान तुम्हारा, या ख़्वाजा !

सारा अना सागर कूज़े में भर आया
सुनते ही फ़रमान तुम्हारा, या ख़्वाजा !

तुम पे है फ़ैज़ान जनाब-ए-‘उस्माँ का
हम पे है फ़ैज़ान तुम्हारा, या ख़्वाजा !

तुम पे है फ़ैज़ान मदीने वाले का
हम पे है फ़ैज़ान तुम्हारा, या ख़्वाजा !

फ़ैज़-ए-मदीना मिलता है अजमेर से ही
रौज़ा है ज़ीशान तुम्हारा, या ख़्वाजा !

रहे सलामत सुन्नी-दावत-ए-इस्लामी
ये तो है फ़ैज़ान तुम्हारा, या ख़्वाजा !

हरगिज़ न सम्मान वो पाएगा जग में
जो भी करे अपमान तुम्हारा, या ख़्वाजा !

इन दोनों पर ख़ास करम तुम फ़रमाना
शाकिर और रिज़वान तुम्हारा, या ख़्वाजा !

सय्यिद को तयबा की गलियाँ दिखला दो
है अदना दरबान तुम्हारा, या ख़्वाजा !

शायर:
सय्यिद मुहम्मद क़ादरी

ना’त-ख़्वाँ:
क़ारी रिज़वान ख़ान
सय्यिद मुईनुद्दीन चिश्ती

Sab ke Hajat Rawa Garib Nawaz Naat Lyrics

Manqabat Khwaja Garib Nawaz

دہلی راجستا ن تمہارا یا خواجہ
دہلی راجھستا ن تمہارا یا خواجہ
سارا ہندوستان تمہارا یا خواجہ
ہند میں نوے لاکھ کو کلمہ پڑھوایا
ہم پر ہے احسان تمہارا یا خواجہ
سارا انا ساگر کوزے میں بھر آیا
سنتے ہی فرمان تمہارا یا خواجہ
فیضِ مدینہ ملتا ہے اجمیر سےبیا
روضہ ہے ذیشان تمہارا یا خواجہ
ان دونوں پہ خاص کرم تم فرمانا
شاکر اور رضوان تمہارا یا خواجہ
سید کو طیبہ کی گلیاں دکھلا دو
ہے ادنٰی دربان تمہارا یا خواجہ

 

DAYAAR E HIND ME RAB KI ATA GHARIB NAWAZ NAAT LYRICS

हिन्द के राजा ख़्वाजा ग़रीब नवाज़

*🌺हिन्द के राजा ख़्वाजा ग़रीब नवाज़🌺*
*_आओ इ़ल्म दीन सीखें और सिखाएं …✍🏻_*

🌸 *हिन्द के राजा ख़्वाजा ग़रीब नवाज़*🌸
*नाम – मोइन उद्दीन हसन चिश्ती*
*लक़ब – हिन्दल वली,गरीब नवाज़*
*वालिद – सय्यद गयास उद्दीन हसन*
*वालिदा – बीबी उम्मुल वरा (माहे नूर)*
*विलादत – 530 हिजरी,खुरासान*
*विसाल – 6 रजब 633* *हिजरी,अजमेर शरीफ*

*वालिद की तरफ से आपका सिलसिलए नस्ब इस तरह है मोइन उद्दीन बिन गयास उद्दीन बिन नजमुद्दीन बिन इब्राहीम बिन इदरीस बिन इमाम मूसा काज़िम बिन इमाम जाफर सादिक़ बिन इमाम बाक़र बिन इमाम ज़ैनुल आबेदीन बिन सय्यदना इमाम हुसैन बिन सय्यदना मौला अली रिज़वानुल लाहे तआला अलैहिम अजमईन।*
*वालिदा की तरफ से आपका नस्ब नामा युं है बीबी उम्मुल वरा बिन्त सय्यद दाऊद बिन अब्दुल्लाह हम्बली बिन ज़ाहिद बिन मूसा बिन अब्दुल्लाह मखफी बिन हसन मुसन्ना बिन सय्यदना इमाम हसन बिन सय्यदना मौला अली रिज़वानुल लाहे तआला अलैहिम अजमईन,गोया कि आप हसनी हुसैनी सय्यद हैं,*
📕 तारीखुल औलिया,सफह 74

*मसालेकस सालेकीन में हैं कि आप और हुज़ूर ग़ौसे पाक रज़ियल्लाहु तआला अन्हु आपस में खाला ज़ाद भाई हैं और वहीं सिर्रूल अक़ताब की रिवायत है कि ख्वाजा गरीब नवाज़ एक रिश्ते से हुज़ूर ग़ौसे पाक रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के मामू होते हैं,*
📕 मसालेकस सालेकीन,जिल्द 2,सफह 271
📕 सिर्रूल अक़ताब,सफह 107

*आपकी वालिदा फरमाती हैं कि जिस दिन से मेरे शिकम में मोइन उद्दीन के जिस्म में रूह डाली गयी उस दिन से ये मामूल हो गया कि रोज़ाना आधी रात के बाद से सुबह तक मेरे शिकम से तस्बीह व तहलील की आवाज़ आती रहती,और जब आपकी विलादत हुई तो पूरा घर नूर से भर गया,आपके वालिद एक जय्यद आलिम थे आपकी इब्तेदाई तालीम घर पर ही हुई यहां तक कि 9 साल की उम्र में आपने पूरा क़ुरान हिफ्ज़ कर लिया,मां का साया तो बचपन में ही उठ गया था और 15 साल की उम्र में वालिद का भी विसाल हो गया,*
📕 मीरुल आरेफीन,सफह 5

*वालिद के तरके में एक पनचक्की और एक बाग़ आपको मिला जिससे आपकी गुज़र बसर होती थी,एक दिन उस बाग़ में दरवेश हज़रत इब्राहीम कन्दोज़ी आये गरीब नवाज़ ने उन्हें अंगूर का एक खोशा तोड़कर दिया,हज़रत इब्राहीम सरकार गरीब नवाज़ को देखकर समझ गए कि इन्हें बस एक रहनुमा की तलाश है जो आज एक बाग़ को सींच रहा है कल वो लाखों के ईमान की हिफाज़त करेगा,आपने फल का टुकड़ा चबाकर गरीब नवाज़ को दे दिया जैसे ही सरकार गरीब नवाज़ ने उसे खाया तो दिल की दुनिया ही बदल गयी,हज़रत इब्राहीम तो चले गए मगर दीन का जज़्बा ग़ालिब आ चुका था आपने बाग़ को बेचकर गरीबो में पैसा बांट दिया,खुरासान से समरक़न्द फिर बुखारा इराक पहुंचे और अपने इल्म की तकमील की,*
📕 अहसानुल मीर,सफह 134

*आप एक मर्शिदे हक़ की तलाश में निकल पड़े और ईरान के निशापुर के क़रीब एक बस्ती है जिसका नाम हारूनाबाद है,जब आप वहां पहुंचे तो हज़रत ख्वाजा उस्मान हारूनी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को देखा और उन्होंने आपको,मुर्शिदे बरहक़ ने देखते ही फरमाया कि आओ बेटा जल्दी करो मैं तुम्हारा ही इंतेज़ार कर रहा था अपना हिस्सा ले जाओ हालांकि इससे पहले दोनों की आपस में कभी कोई मुलाक़ात नहीं हुई थी,खुद सरकार गरीब नवाज़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि “जब मैं उस महफिल में पहुंचा तो बड़े बड़े मशायख बैठे हुए थे मैं भी वहीं जाकर बैठ गया तो हज़रत ने फरमाया कि 2 रकात नमाज़ नफ्ल पढ़ो मैंने पढ़ा फिर कहा किबला रु होकर सूरह बक़र की तिलावत करो मैंने की फिर फरमाया 60 मर्तबा सुब्हान अल्लाह कहो मैंने कहा फिर मुझे एक चोगा पहनाया और कलाह मेरे सर पर रखी और फरमाया कि 1000 बार सूरह इखलास पढ़ो मैंने पढ़ी फिर फरमाया कि हमारे मशायख के यहां फक़त एक दिन और रात का मुजाहदा होता है तो करो मैंने दिन और रात नमाज़ों इबादत में गुज़ारी,दूसरे रोज़ जब मैं हाज़िर हुआ क़दम बोसी की तो फरमाया कि ऊपर देखो क्या दिखता है मैंने देखा और कहा अर्शे मुअल्ला फिर फरमाया नीचे क्या दिखता है मैंने देखा और कहा तहतुस्सरा फरमाते हैं अभी 12000 बार सूरह इखलास और पढ़ो मैंने पढ़ी फिर पूछा कि अब क्या दिखता है मैंने कहा कि अब मेरे सामने 18000 आलम हैं फरमाते हैं कि अब तेरा काम हो गया” उसके बाद भी सरकार गरीब नवाज़ 20 साल तक अपने मुर्शिद के साथ ही रहें,*
*📕 अनीसुल अरवाह,सफह 9*

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